Ancient science is ornamented with solution of every problem,
no matter astrology or Ayurveda, so don’t go with fears try some facts

Ayurveda is a Sanskrit word that refers to the ‘science of life and longevity’. It is the only medicinal system in the world that follows preventive + curative methodology. The base of Ayurvedic philosophy is to balance the body, mind and spirit. According to Ayurveda, each person is born with a life force that comprises the five elements or building blocks of nature: Earth, Air, Water, Fire and Space. We possess a unique balance of these five elements in varying degrees. This unbalancing of elements is known as a Dosha.

  • पितृ दोष
  • मांगलिक दोष
  • काल सर्प दोष और
  • शनि साढ़े साती दोष

पित्र दोष क्या है?

यदि हम कुंडली की ओर एक नज़र डालें तो पित्र दोष के बारे में बताया जाता है। लेकिन कुछ ज्योतिषियों द्वारा पितृ दोष की जो व्याख्या की जाती है उसे हम पूरी तरह से स्वीकार तो कर ही नही सकते जिसके अनुसार कहा जाता है क अगर आपके साथ कुछ भी बुरा हो रहा है तो उसका कारण आपके पितरो या पूर्वजों का आपसे नाराज़ होना है। जैसे यदि आपकी सतांन को किसी दुर्घटना का सामना करना पड़ा, या फिर व्यवसाय में आपको भरी नुक्सान उठाना पड़ा तो इसका कारण आपका पितृ दोष है और आपके पितृ आपसे नाराज़ हैं ।

अगर यह थोड़ी सी भी सजगता से सोचा जाये, जो के हम ज्योतिषियों की बात सुनते वक़्त बिलकुल ही भूल जाते हैं, यदि हमारी संतान कोई भी गलती करे तो क्या हम सजा के तौर पर उसे नुकसान पंहुचा सकते हैं? नहीं! हम ऐसा करने की सोच तक नहीं सकते । यही बात हमे सोचनी चाहिए कि जब हम साधारण मनुष्य होकर ये काम नही कर सकते हो फिर हमारे पितृ जो अब देव योनी में हैं वो ऐसा केसे कर सकते हैं? लेकिन हम इस बात पर विचार करते ही नही हैं बल्कि हम तो उनके बारे में न जाने क्या-क्या सोचना शुरू कर देते हैं । उन्हें प्रसन्न करने की विधि प्रारंभ कर देते हैं, जबकि ऐसा नही होता ।

कभी विचार किया है पितृ कब बनते हैं ?

कहा जाता है कि मनुष्य में आठ तरह के विकार होते हैं – काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ, अहंकार, इर्ष्या और द्वेष । जब इन आठ विकारों से उपर उठने के उपरांत पितृ योनी अथवा देव योनी मिलती है। यदि वो क्रोध करते हैं हैं तो वो एक योनी नीचे आ जायेंगे, अर्थात मनुष्य योनी में आ जायेंगे। अब आप स्वंम ही विचार करके देखिये कि आपकी किसी गलती के लिए वो अपनी योनी का अनादर क्यों करेंगे ? लेकिन आप ये सोचते ही नही हैं, और पितरो को दोष देना और उनकी संतुष्टि के लिए तरह-तरह की विधियाँ करना शुरू कर देते हैं ।

पितृ दोष को समझना बहुत जरुरी है । मान लीजिये हमारे पितरो ने कुछ भी ऐसा कर्म किया जिस पैर किसी और का अधिकार था, लेकिन उन्होंने वो अधिकार उन्हें समर्पित नही किया बल्कि उसका संशय किया। यदि हम ऐसे धन का उपभोग करते हैं जिस पर हमारे अधिकार है ही नही, तो हमारे पितरो के संशय को हम भोग रहे हैं और दुसरे लोग दुखी हैं तो वह दोष इस तरह हम तक आता है ।

अब इस तरह के दोष को दूर केसे करें? बहुत ही आसन सा तरीका है या तो हम समाज की उन्नति के लिए कार्य करें या फिर उसी व्यक्ति की खोज कर उसकी मदद करें जिसके साथ हमारे पितृ अन्याय कर बैठे हैं । लेकिन् यह करना थोडा मुश्किल है क्युकी हम ये स्वीकार करते ही नही हैं कि हमने किसी क भी साथ अन्याय किया है। इस अवस्था में सबसे आसन उपाय जो हम कर सकते हैं वो ये है कि हम समाज के लिए ही कुछ अच्छे कार्य कर लें अथवा जन सेवा में धन लगा दें तो भी पितृ दोष दूर होता है।

मांगलिकदोष क्या है?

अब बात करते हैं मांगलिक दोष की । मांगलिक दोष के बारे में बोला जाता है की कुंडली में मंगल है । अब कोई ऐसे लोगों को केसे समझाये के बिना मंगल के कोई कुंडली होती ही नही है । कुंडली के १२ खानों में से ५ खानों में मंगल होता है तो उन्हें मांगलिक कहते हैं । यदि किसी की कुंडली के पहले, चौथे, सातवे, आठवे और बारहवे खाने में मंगल होता है उन्हें मांगलिक कहते हैं ।

जैसे कि पुराने ज़माने में कहा जाता था के यदि लड़की या लड़का मांगलिक है तो उनकी शादी भी मांगलिक लड़के या लड़की से होनी चाहिए, या फिर उनकी शादी पेड़ से करायी जाती थी। लेकिन यह परिभाषा, ये तथ्य कहा तक उचित है?

हर एक तथ्य को तर्क की कसौटी पर कम से कम एक बार परखना तो बनता है ।

काल सर्प दोष क्या है?

जब भी लोग काल सर्प दोष की बात करते हैं, बहुत ही भय और चिंता के साथ इसका व्याख्यान करते हैं। देखा जाये तो इसमें उनका कोई दोष नही है । वो कुछ ज्योतिषियों द्वारा कहे गये शब्दों से इतना डर जाते हैं और कई तरह के भ्रम में आ जाते हैं, जो कि उनके शब्दों में साफ़ झलकता है ।

12 regions and 9 planets are formed in Vedic astrology. Apart from planets Sun, Jupiter, Saturn, Mars, Venus, Moon and Mercury and two other Rahu and Ketu are also considered as planets. When all the planets align on either side of the axis of Rahu-Ketu, KaalSarp Yoga is generated.

जैसे कि कुछ ज्योतिषियों का ये कहना कि काल सर्प दोष जीवन को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। जो भी व्यक्ति काल सर्प दोष से पीड़ित होता है उसका जीवन अशुभ स्तिथियों, परेशानियों, महत्वहीनता और दुर्बलता से भर जाता है।  काल सर्प योग के प्रभाव में रहने वालों को सांप और सांप के काटने का बड़ा डर होता है। वे अक्सर खुद के बारे में सपने देखते हैं कि वे सांपों के कब्जे में हैं, और भी न जाने क्या क्या।

Myth or False belief of KaalsarpDosha

  • The person who is under the influence of this dosha is very much afraid of snake bites.
  • If a person has killed a snake in their life, then they will have KalSarpDosha in their next birth.
  • They often dreamed about themselves bitten by a snake.

हलाकि ज्योतिष जीवन द्वारा जीवन को उत्तम बनाया जा सकता है लेकिन कुछ ज्योतिषियों की बातों को सम्पूर्ताया मानकर बिना विचार किये मान लेना भी समझदारी को नही दर्शाता| किसी भी बात पर पूरी तरह विश्वास करने से पहले उसे भली प्रकार से सोच विचार करना अति आवश्यक है |

शनि साढ़े साती दोष क्या है?

शनि साढ़ेसाती, यानि साढ़े सात सालों का समय, यदि हम साढ़ेसाती काल की बातकरते हैं तो इस स्तिथि में शनि तीन राशियों में से प्रत्येक में गुजरता है। एक राशि चक्र में तुरंत चंद्रमा की राशि से आगे निकल जाता है जो शनिछाया सती काल शुरू होने पर बहुत कम होता है। शनि साढ़े साती आगे के चरण, अंतिम चरण और सेटिंग चरण जैसे तीन चरणों में आगे बढ़ता है।

जब शनि ग्रह चंद्रमा के चिन्ह से किसी व्यक्ति के कुंडली चार्ट में पहले, चौथे, आठवे और दसवे घर में यात्रा करता है, साढ़े साती का योग होता है।

Astrology believes, Shani Sade Sati is a time when a person spends almost seven and a half years of his life associated with difficulties and challenges. The cause of Shani Sade Sati brings a lot of suffering in our lives, due to the fact that it permeates our mind and targets our logical and rational thinking resulting in adverse life. कुछ ज्योतिषि ग्रहों की दशा को कुछ इस तरह बताते हैं कि लोग बिना विचार किये ही उसे सत्य मानकर उनके बताये हुए विधि विधान करने में लग जाते हैं| कृपया कोई भी क्रिया करने से पहले थोडा सोच विचार अवश्य करें|

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